बाम्बे सिनेमा तब और अब पर सचित्र व्याख्यान।

देहरादून, 27 अप्रेल, 2026दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से आज बॉम्बे सिनेमा तब और अब विषय पर एक विशेष सचित्र व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर फिल्मकार एवं अध्येता यूसुफ सईद ने हिंदी सिनेमा के विविध आयामों पर विस्तार से प्रकाश डाला।

अपने व्याख्यान में यूसुफ सईद ने 21वीं सदी के बॉम्बे सिनेमा में आए विषयगत, तकनीकी एवं सौंदर्यबोध संबंधी परिवर्तनों की चर्चा करते हुए बताया कि किस प्रकार नई सदी में सिनेमा ने पारंपरिक फिल्मों और उनके कथानकों से आगे बढ़कर सामाजिक यथार्थ, पहचान, राजनीति, और वैश्वीकरण जैसे मुद्दों को किस तरह प्रस्तुत किया है। उन्होंने फिल्मों के चयनित दृश्यों, पोस्टरों और दृश्य-सामग्री के माध्यम से अपने विचारों को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया, जिससे श्रोताओं को विषय को समझने में विशेष सहूलियत मिली।उन्हांेने कई पुरानी फिल्मों के टुकड़े दिखाकर उनके कथानक को उपस्थित लोगों के सामने रखा।

कार्यक्रम में यह भी रेखांकित किया गया कि डिजिटल तकनीक के आगमन ने सिनेमा के निर्माण, वितरण और उपभोग के स्वरूप को व्यापक रूप से बदल दिया है। कार्यक्रम में शहर के बुद्धिजीवियों, विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा कला एवं सिनेमा में रुचि रखने वाले नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। व्याख्यान के उपरांत प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जिज्ञासाएँ व्यक्त कीं और अपने सवाल किये।

कार्यक्रम में दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र के कार्यक्रम अधिकारी चन्द्रशेखर तिवारी ने फिल्मकार एवं अध्येता यूसुफ सईद का व्यााख्यान देने के लिए आभार प्रकट किया और कहा कि केन्द्र की ओर इस प्रकार के कार्यक्रमों के माध्यम से साहित्य, कला और सिनेमा के प्रति जन-रुचि को बढ़ावा देने का सतत प्रयास किया जा रहा है।

कार्यक्रम में पुस्तकालयाध्यक्ष डाॅ. डी. के. पाण्डे, डाॅ. लालता प्रसाद , सुन्दर बिष्ट ,जगदीश महर, मधन बिष्ट आलोक सरीन, विनोद सकलानी,इरा सिंह, कुल भूषण, विजय पाहवा, मोहन चैहान, कर्नल दुग्गल सहित कई फिल्म प्रेमी व अन्य लोग उपस्थित रहे

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