सामाजिक विकास और दिव्यांग जनों के अधिकारों पर विमर्श का दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र में आयोजन।

देहरादून – दून पुस्तकालय एवं शोध केंद्र की ओर से आज सायं केंद्र के सभागार में दिव्यांग जनों के अधिकार अधिनियम 2016 बनाम सांस्कृतिक धारणाओं को लेकर सामाजिक विकास पर एक प्रारम्भिक स्तर पर विमर्श का आयोजन किया गया।

यह विमर्श एक सक्रिय सम्मेलन के तौर पर सामने आया। इसमें नागरिक समाज संगठन, स्वदेशी, ग्रामीण और कृषक समुदायों के प्रतिनिधियों, जमीन से जुड़े संगठन, शिक्षाविद, मुख्यधारा और वैकल्पिक मीडिया और प्रेस, शिक्षक, छात्र, शोधार्थी और ग्राम पंचायत के सदस्यों ने प्रतिभाग किया। अपने कार्य अनुभवों के माध्यम से वक्ताओं ने इस दिशा में सार्थक पहल किये जाने का सुझााव दिया।

चर्चा के प्रतिभागियों का मानना था कि दिव्यांगों की स्थिति के प्रति अभिशप्तता और अपर्याप्त अनुकूलन सामाजिक रूप से स्वीकृत भूमिकाओं को पूर्ण करने में असमर्थता के साथ गहराई से जुड़े हुए हैं।

इस चर्चा का प्रमुख उद्देश्य यही है कि ग्रामीण संदर्भों में दिव्यांगता और समावेशन की सूक्ष्म समझ को बढ़ावा देकर ग्रामीण और स्वदेशी विचारों को मुख्य धारा में लाया जाय। वक्ताओं ने भौगोलिक, सांस्कृतिक और सामाजिक-आर्थिक विविधता को ध्यान में रखकर एक प्रासंगिक, समावेशी और अंतर-विषयक दृष्टिकोण की आवश्यकता पर बल दिया।

चर्चा की अध्यक्षता विवेकानंद नेत्रालय के बाल रोग विशेषज्ञ(नेत्र रोग विशेषज्ञ और ऑप्टोमेट्रिस्ट), डॉ. संदीप घिल्डियाल ने की। उन्होंने कहा कि दिव्यांगता के प्रति हमें अपनी सामाजिक नजरिये को बदलना होगा।ह उनके प्रति हमें संवेदनशील बनना होगा। हमें अपने परिवार और स्कूल से ही इन लोगों के प्रति सकारात्मक रुख अपनाकर उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में समुचित प्रयास किये जाने की जरुरत है।

सामाजिक कार्यकर्ता व आजीविका, शिक्षा, कृषि, सामुदायिक रेडियो और प्रकृति संरक्षण के अरुण सरकार, देशी बीज, कृषि-ज्ञान और जल निकायों कीें कार्यकर्ता वेद अमृता, शामिल रहीं। इसके अलावा इस महत्वपूर्ण चर्चा में अवधेश के. शर्मा, शैक्षिक समन्वयक, रिलेक ; वन गुज्जरों के सशक्तीकरण कार्यकर्ता,सुंदर थापा,सामाजिक कार्यकर्ता और मानवाधिकार कार्यकर्ता, और श्रवण एवं बहुदिव्यांगता वाले व्यक्तियों के लिए समावेशी शिक्षा एवं सशक्तिकरण की प्रचारक; उपाध्यक्ष, उत्तराखंड डिस्लेक्सिया एवं डिसीएबिलिटी एसोसिएशन (उड़ान) की अंजलि अग्रवाल ने भी भाग लिया। वक्ताओं ने समाज में हर तरह से दिव्यांग जनों को मज़बूत कर उन्हें उनके कार्यों , विशेषताओं व अधिकारों अधिनियम के प्रति सजग कर अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए।

कार्यक्रम का संचालन सामाजिक उद्यमी व संस्थापक निदेशक, साहस फाउंडेशन समावेशी संसाधन केंद्र के शाहब नकवी, ने किया। इस अवसर पर सभागार में निकोलस हॉफ़लैण्ड,चन्द्रशेखर तिवारी, सुरेन्द्र सिंह सजवाण, योगेंद्र सिंह, कुश कुमार मिश्र, अजय शर्मा, विवेक तिवारी, आलोक कुमार, गौरव मिश्रा सुंदर बिष्ट और अम्मार नक़वी सहित विभिन्न सामाजिक संस्थाओं से जुडे़ व्यक्ति , लेखक, युवा पाठक, व शहर के अन्य संभा्रन्त व्यक्ति उपस्थित रहे ।

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