बीजिंग– तिब्बत में आए शक्तिशाली भूकंप की वजह से करीब 126 लोगों की मौत हो गई. भूकंप के झटके पड़ोसी नेपाल, भूटान और भारत में भी महसूस किए गए. तिब्बत में आए इस भूकंप ने एक बार चीन की इस क्षेत्र में एक बड़ा बांध बनाने की योजना को सवालों के घेरे में ला दिया है. दूसरे शब्दों में कहा जाए, तो परोक्ष रूप से इस भूकंप के पीछे की वजह चीन के डैम प्रोजेक्ट हो सकते हैं. चीन भूकंप नेटवर्क केंद्र के अनुसार, भूकंप सुबह 9:05 बजे (0105 जीएमटी) आया, जिसका केंद्र टिंगरी में 10 किमी (6.2 मील) की गहराई पर था. टिंगरी एक ग्रामीण काउंटी है जिसे माउंट एवरेस्ट के उत्तरी प्रवेश द्वार के रूप में जाना जाता है. अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्विस ने भूकंप की तीव्रता 7.1 बताई.
चीन के सरकारी टेलीविजन ने 10 घंटे घंटे बाद बताया कि तिब्बती क्षेत्र और आसपास के हिस्से में 100 से अधिक लोगों की मौत हो गई और 130 लोग घायल हो गए. भूकंप का असर तिब्बत के शिगात्से क्षेत्र में महसूस किया गया, जहां 800,000 लोग रहते हैं. इस क्षेत्र का प्रशासन शिगात्से शहर द्वारा किया जाता है, जो तिब्बती बौद्ध धर्म के सबसे महत्वपूर्ण व्यक्तियों में से एक पंचेन लामा का पारंपरिक निवास स्थान है. चीन, नेपाल और उत्तरी भारत के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से अक्सर भारतीय और यूरेशियाई टेक्टोनिक प्लेटों के टकराव के कारण भूकंप से प्रभावित होते हैं।
चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य चलाने के लिए हर संभव प्रयास करने के आदेश दिए।
शी ने घायलों के उपचार के लिए हरसंभव प्रयास करने का आदेश दिया तथा द्वितीयक आपदाओं (भूकंप के बाद संभावित आपदाओं) को रोकने, प्रभावित निवासियों के समुचित पुनर्वास तथा इसके बाद के कार्यों को प्रभावी ढंग से करने के लिए प्रयास करने का आग्रह किया।
भूकंप इतना शक्तिशाली था कि नेपाल के लोग घबरा गए। इसने 2015 में आए भीषण भूकंप की दुखद याद ताजा कर दी, जिसमें 9,000 लोग मारे गए थे।