उत्तराखंड के कई गांवों में मुस्लिम बहुसंख्यक हो गए हैं.
बाहरी लोगों की घुसपैठ से जनजातीय क्षेत्र भी प्रभावित.
सरकार को जनजातीय क्षेत्र की सुरक्षा पर ध्यान देना चाहिए.
विकास नगर –बाहरी लोगों की घुसपैठ और जमीनों पर कब्जों के मामलों में अब जनजातीय क्षेत्र भी अछूता नहीं रहा. एक दर्जन से अधिक गांव ऐसे सामने आएं हैं, जिनकी सूरत पूरी तरह बदल चुकी है. अब यहां मुस्लिम समुदाय के लोगों की संख्या ज्यादा और हिंदू अल्पसंख्यक हो चुका है. उत्तराखंड में डेमोग्राफिक चेंज, बाहरी लोगों की घुसपैठ के आंकड़े किसी से छिपे नहीं है… ऐसे में अब इसकी चपेट से जनजातीय क्षेत्र भी अछूता नहीं है।
देहरादून जनपद के सीमावर्ती त्यूणी क्षेत्र में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं. इनमें एक दर्जन से अधिक गांव ऐसे हैं, जहां आज हिंदू अल्पसंख्यक होता जा रहा है और बाहरी लोग की बड़ी संख्या में इजाफा हुआ है.
कई गांव मुस्लिमों के
आज कई गांव यहां मुस्लिम लोगों के बन गए हैं. गांव पुटाड़ के अंतर्गत आने वाली बस्ती धनराश में ऐसे ही हालात बन चुके हैं. त्यूणी तहसील क्षेत्र में मात्र 40 साल में यहां भारी बदलाव हुआ है.
पूटाड़ ग्राम पंचायत में 40 साल पहले 1 परिवार मुस्लिम आया था और आज यहां 30 परिवार हो गए.
-सुनीर गांव जहां 1 मुस्लिम परिवार आया था. आज 45 मुस्लिम परिवार हो गए.
-हनोल क्षेत्र का भी यही हाल है. यहां 32 से अधिक परिवार हो गए हैं.
-ऐसे एक दर्जन से अधिक गांव है, जहां मुस्लिम बस्ती बन चुकी है.
मुस्लिम लोगों का कहना है कि वह लंबे समय से यहां रहते है और जमीनें भी नाम हैं, लेकिन जमीन नाम कैसे हुई ये नहीं पता. साथ ही वोटर कार्ड, राशन कार्ड और आधार कार्ड भी इन लोगों ने यहां के तैयार कर रखे हैं.. जबकि यह क्षेत्र जनजातीय होने के चलते यहां कोई भी बाहरी व्यक्ति जमीन नहीं ले सकता।
वन गुर्जर के रूप में क्षेत्र में पहुंचा था मुस्लिम समुदाय
आपको बता दें कि बाहर से आए मुस्लिम समुदाय के लोग शुरू में वन गुर्जर के रूप में क्षेत्र में पहुंचे और वन विभाग से परमिट लेकर यहां गर्मी के मौसम में रहा करते थे और ठंड के मौसम फिर वापस चले जाते थे, लेकिन कुछ परिवार यहां स्थाई रूप से रहने लगे और लोगों के बाग-बगीचे में चौकीदारी का काम करने लगे. उस दौरान क्षेत्र में मात्र 44 मुस्लिम परिवार थे. धीरे धीरे संख्या बढ़ती गई और आज गांव के गांव मुस्लिम के बस गए. फिर सैटिंग गैटिंग के तहत यहां जमीनें अपने नाम कर ली. आज आलम ये हो गया कि यहां एक दर्जन से अधिक मुस्लिम गांव बन चुके हैं. इन गांवों की सूरत पूरी तरह बदल चुकी है.
जनजातीय क्षेत्र में इस तरह बाहरी लोगों की घुसपैठ उसमें भी एक ही समुदाय के लोगों का यहां बसना और फिर जमीनें इनके नाम हो जाना चिंताजनक बन चुका है. सरकार को इस और ध्यान देना चाहिए, ताकि जनजातीय क्षेत्र को घुसपैठियों से बचाया जा सके।